हनुमान जी की २१ अलौकिक शक्तियां

अणिमा: अत्यंत सूक्ष्म रूप धारण करने की शक्ति ।
महिमा: स्वयं को विशाल या बड़ा करने की क्षमता ।
गरिमा: शरीर को अत्यधिक भारी बनाने की शक्ति ।
लघिमा: शरीर को अत्यंत हल्का बना लेना ।
प्राप्ति: इच्छा अनुसार कहीं भी पहुँचने की शक्ति ।
प्राकाम्य: इच्छा अनुसार कुछ भी प्राप्त करने की क्षमता ।
ईशित्व: प्रभुता, दैवीय शक्ति और प्रकृति पर नियंत्रण ।
वशित्व: सभी को अपने वश में करने की शक्ति ।
अमरता/चिरंजीवी: सदैव जीवित रहने का वरदान (अष्ट चिरंजीवी में से एक) ।
बुद्धि और विद्या के दाता: ज्ञान और बुद्धि का भंडार होना।
अतुलित बल: सबसे शक्तिशाली, वानरों के ईश्वर ।
संजीवनी लाने की शक्ति: संजीवनी पर्वत ले आने की शक्ति ।
सीता अन्वेषण पंडित: समुद्र लांघकर सीता जी की खोज करने की शक्ति ।
कालनेमि प्रमथन: कालनेमि जैसे राक्षसों का विनाश करने की शक्ति ।
सूर्य निगलना: बचपन में सूर्य को फल समझकर निगलने की शक्ति ।
पार्थ ध्वजाग्रसंवासिनी: अर्जुन के रथ पर विराजमान रहने की शक्ति ।
यथेच्छ रूप धारण: इच्छा अनुसार कोई भी रूप लेने की क्षमता (कामरूप) ।
सर्वव्यापकता: एक ही समय में अनेक जगह होने की शक्ति ।
इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र को रोकना: ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने की शक्ति ।
सुगंधित वक्ता/वाग्मिने: ज्ञानी और श्रेष्ठ वक्ता ।
भक्तवत्सल: भक्तों के सभी दुखों और बाधाओं को पलभर में दूर करने की शक्ति ।

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