श्री गुप्त नवरात्र महिमा

गुप्त_नवरात्र

माघमासके शुक्लपक्षके प्रथम नौ तिथियाँ गुप्त नवरात्र कही जाती हैं । एक वर्षमें कुल चार नवरात्र होते हैं, जिनमेंसे सामान्यतः दो नवरात्रियोंके बारेमें सबको पता रहता है, पर शेष दो गुप्त नवरात्र हैं । माँ दुर्गाकी आराधना वैसे तो प्रत्येक दिन की जानी चाहिये, लेकिन नवरात्रमें देवीकी पूजा का विशेष महत्त्व है । चैत्र और आश्विनमासके शुक्लपक्षकी प्रतिपदासे नवमीतक नौ दिनोंमें देवीके नौ रूपोंकी आराधना का विधान है । इन नवरात्रोंको वासन्तिक नवरात्र और शारदीय नवरात्रके रूप में जाना जाता है । इनके अलावा भी सालमें दो नवरात्र ऐसे आते हैं, जिनमें माँ दुर्गाकी दस महाविद्याओंकी पूजा-अर्चना की जाती है । तंत्र-विद्यामें आस्था रखने वाले लोगोंके लिये यह नवरात्र बहुत महत्त्व रखते हैं । इन नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है, आषाढ़ और माघमासके शुक्लपक्षकी प्रतिपदासे नवमीतक नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है । गुप्त नवरात्रका समय शाक्त एवं शैव-धर्मावलंबियोंके लिए तंत्र साधनाओंके लिये अधिक शुभ होता है । तंत्र-साधकोंके लिये यह समय महत्त्वपूर्ण है, इन दिनों दस महाविद्याकी साधना कल्याणकारी सिद्ध होगी । जो मुक्तिका मार्ग बताती है, उसे " विद्या " कहते हैं और जो भोग और मोक्ष दोनों देती है; उसे महाविद्या कहते हैं । दस महाविद्या इस प्रकार हैं— इन महाविद्याओंके प्रकट होनेकी कथा महाभागवत—देवीपुराण में वर्णित है । इनका नाम तथा कृपाफल कुछ ऐसा है— १ #काली : दस महाविद्याओं में यह प्रथम है । कलयुग में इनकी पूजा-अर्चनासे शीघ्र फल मिलता है । २ #तारा : सर्वदा मोक्ष देनेवाली और तारनेवालीको ताराका नाम दिया गया है । सबसे पहले महर्षि वसिष्ठने माँ तारा की पूजा की थी । आर्थिक उन्नति और बाधाओंके निवारणहेतु माँ तारा महाविद्याका महत्त्वपूर्ण स्थान है । इसकी सिद्धिसे साधककी आयके नित्य नये साधन बनते हैं । जीवन ऐश्वर्यशाली बनता है । इसकी पूजा गुरुवारसे आरम्भ करनी चाहिये । इससे शत्रुनाश, वाणी-दोष-निवारण और मोक्षकी प्राप्ति होती है । ३ #छिन्नमस्ता : मां छिन्नमस्ताका स्वरूप गोपनीय है । इनका सर कटा हुआ है । इनके कबन्धसे रक्तकी तीन धाराएँ निकल रही हैं । जिसमें-से दो धाराएँ उनकी सहेलियाँ और एक धारा स्वयं देवी पान कर रही हैं । चतुर्थ संध्याकालमें छिन्नमस्ताकी उपासनासे साधकको सरस्वतीकी सिद्धि हो जाती है । राहु इस महाविद्याका अधिष्ठाता ग्रह है । ४ #त्रिपुरभैरवी : आगम ग्रंथोंके अनुसार त्रिपुरभैरवी एकाक्षररूप हैं । शत्रु-संहार एवं तीव्र तन्त्र-बाधा-निवारण के लिये भगवती त्रिपुरभैरवी महाविद्या-साधना बहुत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है । इससे साधक के सौन्दर्यमें निखार आ जाता है । इसका रंग लाल है और यह लाल रंगके वस्त्र पहनती हैं । गलेमें मुण्डमाला है तथा कमलासन पर विराजमान है । त्रिपुरभैरवीका मुख्य लाभ बहुत कठोर साधनासे मिलता है । ५ #धूमावती : धूमावती का कोई स्वामी नहीं है । इसकी उपासनासे विपत्तिनाश, रोग-निवारण तथा युद्धमें विजयकी प्राप्त होती है । ६ #बगलामुखी : बगलामुखी शत्रु-बाधाको पूर्णतः समाप्त करनेके लिये बहुत महत्त्वपूर्ण साधना है । इस विद्याके द्वारा दैवी प्रकोपकी शान्ति, धन-धान्य-प्राप्ति, भोग और मोक्ष दोनोंकी सिद्धि होती है । इसके तीन प्रमुख उपासक ब्रह्मा, विष्णु एवं भगवान् परशुराम रहे हैं । परशुरामजीने यह विद्या द्रोणाचार्यजीको दी थी और देवराज इन्द्रके वज्रको इसी बगला-विद्याके द्वारा निष्प्रभावी कर दिया था । युधिष्ठिरने भगवान् कृष्णके परामर्शपर कौरवोंपर विजय प्राप्त करनेके लिए बगलामुखी देवीकी ही आराधना की थी । ७ #षोडशी_महाविद्या : शक्तिकी सबसे मनोहर सिद्ध देवी हैं । इनके ललिता, राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी आदि अनेक नाम हैं । षोडशी साधनाको राजराजेश्वरी इसलिए भी कहा जाता है; क्योंकि यह अपनी कृपासे साधारण व्यक्ति को भी राजा बनाने में समर्थ हैं । इनमें षोडश कलाएँ पूर्णरूप से विकसित हैं, इसलिये इनका नाम माँ षोडशी है । इनकी उपासना श्रीयन्त्रके रूपमें की जाती है । यह अपने उपासकको भक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करती हैं । बुध इनका अधिष्ठातृ ग्रह है । ८ #भुवनेश्वरी : महाविद्याओंमें भुवनेश्वरी महाविद्या को अद्याशक्ति कहा गया है । माँ भुवनेश्वरीका स्वरूप सौम्य और रंग कान्तिमय है । माँ भुवनेश्वरीकी साधनासे मुख्य रूप से वशीकरण, वाक्-सिद्धि, सुख एवं शत्रुओंपर विजय प्राप्त होती है । पृथ्वीपर जितने भी जीव हैं, सबको इनकी कृपासे अन्न प्राप्त होता है । इसलिए इनके हाथमें शाक और फल-फूल के कारण इन्हें माँ " शाकम्भरी " नामसे भी जाना जाता है । चंद्रमा इनका अधिष्ठातृ ग्रह है । ९ #मातंगी : इस नौवीं महाविद्याकी साधना से सुखी गृहस्थ जीवन, आकर्षक और ओजपूर्ण वाणी तथा गुणवान् पति या पत्नीकी प्राप्ति होती है । इनकी साधना वाममार्गी साधकोंमें अधिक प्रचलित है । १० #कमला : माँ कमला कमलके आसन पर विराजमान रहती हैं । श्वेत रंगके चार हाथी अपनी सूँड़ोंमें जलभरे कलश लेकर इन्हें स्नान कराते हैं । शक्तिके इस विशिष्ट रूपकी साधनासे दरिद्रताका नाश होता है और आय के स्रोत बढ़ते हैं । जीवन सुखमय होता है । यह दुर्गाका सर्वसौभाग्य रूप है । जहाँ कमला हैं, वहां विष्णु हैं । शुक्र इनका अधिष्ठातृ ग्रह है । इन महाविद्याओंकी उपासनाके फलके रूपमें कहा गया है कि पूर्वकालमें साधक यदि दुराचारी भी रहा हो तो सत्संगादिके प्रभावसे भगवतीके प्रति अनन्यता हो जानेसे उसके पापोंका प्रक्षालन हो जाता है और उसकी मुक्ति हो जाती है — 🍂अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक् । सोऽपि पापविनिर्मुक्तो मुच्यते भवबन्धनात् ॥ 🪷 गुप्त नवरात्र पूजा-विधि 🪷 मान्यतानुसार गुप्त नवरात्रके दौरान अन्य नवरात्रोंकी तरह ही पूजा करनी चाहिये । नौ दिनोंके उपवासका संकल्प लेते हुए प्रतिपदा यानी पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिये । घटस्थापनाके बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय माँ दुर्गा की पूजा करनी चाहिये । अष्टमी या नवमीके दिन कन्या-पूजन के साथ नवरात्र-व्रत का उद्यापन करना चाहिये । 🌹 गुप्त नवरात्रका महत्त्व 🌹 देवीभागवतके अनुसार जिस तरह वर्षमें चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रमें देवीके नौ रूपोंकी पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रमें दस महाविद्याओंकी साधना की जाती है । गुप्त नवरात्र विशेषकर तान्त्रिक क्रियाएँ, शक्ति-साधना, महाकाल-उपासना आदिसे जुड़े लोगोंके लिये विशेष महत्व रखती है । इस दौरान देवी भगवतीके साधक बेहद कठिन नियमके साथ व्रत और साधना करते हैं । इस दौरान लोग लम्बी साधना करके दुर्लभ शक्तियोंकी प्राप्ति करनेका प्रयास करते हैं । 🍂 गुप्त नवरात्रकी प्रमुख देवियाँ 🍂 गुप्त नवरात्रके दौरान कई साधक महाविद्या ( तन्त्र-साधना ) के लिये माँ काली, तारादेवी, त्रिपुरसुन्दरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, माँ धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमलादेवीकी पूजा करते हैं ।

✍️ परसों से शुरू हो रही गुप्त नवरात्रि में इन्हीं देवियों पर चर्चा रहेगी ।

जयमाँ #जयजय_माँ


🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿 सुमिरन ऐसा कीजिये , दूजा लखै न कोय। ओंठ न फरकत देखिये , प्रेम राखिये गोय॥💞🙏💞

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▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ ‼️ १७ जनवरी २०२६ ‼️ 📜🏵️ #पञ्चाङ्गम् 🏵️📜 ✡️ #मूल दि. ८|२७ यावत् तदुपरि— 🔯 #पू०षा० दि. ८|२७ उ. ⏩ | 🌝 #धनूराशिः ति. १२ गुरौ रा.शे. ६|५ उ. ⏩ | 💥 #भद्रा दि. ११|२ या. | 👉 यत्र कुत्रापि यो माघेस्मरणन्वितः। करोति मज्जनं तीर्थे सलभेत् गाङ्गमज्जनम्। 👉 माघे मूलकं ( मूली ) भक्षणं न कार्यम्। 👉 मासपर्यंत स्नानेप्यशक्तत्रयहं एकाहं वा स्यात्। 🌅 #सूर्योदयः प्रा. ६|४२ वादने | 🌄 #सूर्यास्तः सा. ५|१८ वादने | पौष पूर्णिमा से माघ स्नान का मन्त्र— दुःखदारिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय च । प्रातः स्नानं करोम्यद्य माघे पाप विनाशने । मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युतमाधव । स्नानेनानेन मे देव यथोक्तफलदो भव ॥ यह मन्त्र पढ़ते हुए स्नान करें । तथा पुनः अर्घ्य दान दें— मन्त्र— सवित्रे प्रसवित्रे च परं धाम जले मम । त्वत्तेजसा परिभ्रष्टं पापं यातु सहस्त्रधा ॥ इसके बाद तर्पण आदि करें । ------------------------------------------------------------------------- 🌞#विविधमुहूर्त्ताः🌞

🌳 ❈ ति. १४ शनौ मासान्तादिदोषः ।

🌀 ❈ ति.१४ शनि को मासान्तदोष है।

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🔴 #मूलविचार 🔴

श्लेषा/#मघा — ति. २ सोमे सा. ४|२३ उ. — ति. ४ बुधे दि. ३|४३ या. |

#ज्येष्ठा/ #मूल — ति. ११ बुधे रा. ३|११ उ. — ति. १४ शनौ दि. ८|२७ या. |


🎊🏵️🕉️ #व्रत_पर्व_एवं_त्योहार 🕉️🏵️🎊

🎊🏵️🎊▪️यह पक्ष पूरे १५ दिन का है। पक्ष के तीन रविवार एवं रविवार की अमावस्या को चतुर्ग्रही योग दैवी प्राकृतिक दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं।

🎊🏵️🎊▪️ नवीन मत के अनुसार गुरु गोविन्द सिंह जयन्ती आज ५ जनवरी सोमवार को मनाई जायेगी।।

🎊🏵️🎊▪️ ‘गणेश चौथ’ के नाम से प्रचलित संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत का मान आज ६ जनवरी मंगलवार को होगी। गणितागत चन्द्रोदय का समय काशी में ८।३५ बजे है अतः उसके बाद चन्द्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन हो जाने पर इस व्रत का पूजन चन्द्रमा को अर्घ्य देकर सम्पन्न किया जायेगा। आज ही के दिन गणेश जी की उत्पत्ति मानी गई है। इसे तिलकुटी एवं वक्रतुण्ड चतुर्थी भी कहते है। पुत्र की की कामना से मातायें इसे श्रद्धा एवं विश्वास के साथ करती हैं।

🎊🏵️🎊▪️सर्वाप्ति सप्तमी एवं सन्त स्वामी श्री रामानन्दचार्य की जयन्ती तथा तिथि मत से स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती १० जनवरी शनिवार को होगी। वहीं अंग्रेजी तारीख के अनुसार स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती १२ जनवरी को मनाई जाती है।

🎊🏵️🎊▪️ष‌ट्तिला एकादशी व्रत का मान सबके लिए १४ जनवरी बुधवार को है।

🎊🏵️🎊▪️ भगवान भास्कर मकर राशि में १४ जनवरी बुधवार को रात्रि ९।१९ बजे से आयेंगे एवं इसी के साथ सूर्य उत्तरायण हो जायेंगे तथा खरमास समाप्त हो जायेगा।

🎊🏵️🎊▪️मकर संक्रान्ति का यह शास्त्रोक्त नियम है कि प्रदोष के बाद रात्रि में किसी भी समय संक्रान्ति लगती है तो उसका पुण्यकाल दूसरे दिन होता है। इस प्रकार मकर संक्रान्ति ( खिचड़ी ) का पर्व १५ जनवरी गुरुवार को मनाया जायेगा। स्नानदान के लिये यह पर्व अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। सर्वत्र गंगा नदी, अन्यत्र नदी तीर्थ एवं कुँआ सरोवर में स्नान किया जायेगा। ऊनी वस्त्र, दुशाला, कम्बल, जूता, धार्मिक पुस्तकें विशेषकर पंचांग का दान विशेष पुण्यफल कारक होता है। इस पर्व को पूरे देश में अपनी स्थानीय परम्परा एवं रीति रिवाज के समय मनाया जाता है।

🎊🏵️🎊▪️ प्रदोष का व्रत १६ जनवरी शुक्रवार को होगा एवं मासशिवरात्रि का व्रत का मान भी आज ही हो जायेगा।

🎊🏵️🎊▪️दान एवं श्राद्ध के लिए अमावस्या मौनी अमावस्या १८ जनवरी रविवार को होगी। मौन व्रत रखकर गंगा स्नान किया जायेगा। प्रयाग राज की त्रिवेणी काशी के दशाश्वमेध तथा पश्चिमी वाहिनी गंगा में आज के दिन का स्नान-दान विशेष पुण्यफल कारक माना गया है। काशी-चन्दौली के चन्द्रावती-बलुआ घाट पश्चिम वाहिनी गंगा में आज का स्नानदान विशेष पुण्यफलकारी होता है।

👉 उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का सूर्य ११ जनवरी रविवार को दिन ३।१६ बजे से आयेगा। उड़द, चावल, पटसन, गुड़, कपास, पीपला, मूल, लाख, चपड़ी, चावल, सरसों में तेजी चलेगी। हाड़ कपाँ देनी वाली सर्दी पड़ेगी। सूर्य के उत्तरायण हो जाने के बाद भी शुक्रास्त के कारण विवाहादि मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं बन पायेंगे। ।


|| माघमासकृत्यम् || 🔸 माघे_प्रयागस्नानमाहात्म्यम् : प्रयागे माघ मासे तु त्र्यहं स्नानस्य यत्फलम् । अश्वमेधसहस्त्रेण तत्फलम् लभते भुवि ॥ [ पृथ्वी पर माघमास में मात्र तीन दिन प्रयाग स्नान करने मात्र से भी १ हजार अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है । ] 🔸यावान्माघं स्नानाशक्तौ त्र्यहं स्नायात् ॥ महामाघीं पुरस्कृत्य स्नायात्तत्रदिनत्रयमिति। [ सम्पूर्ण माघ में तीर्थ स्नान न कर पाने की स्थिति में माघी पूर्णिमा से पूर्व तीन दिनों में विधि पूर्वक अस्थान करें। ] 🔹 माघसनियमाः — भूमौ शयीतहोतव्यं साज्यं तिलसमन्वितम्। सर्वान् कामानवाप्नोति विन्दते परमं सुखम्॥ ✍️ माघमास में जो कहीं से भी प्रयाग का स्मरण करके स्नान करता है, उसे प्रयाग स्नान का फल प्राप्त होता है । माघमासमें मूली नहीं खाना चाहिए।

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📜#श्रीशुभकालयुक्तसंवत्२०८२माघकृष्णपक्षःI
#सौम्यायनंयाम्यगोलःl #शिशिरर्त्तुःl #शनिवारl #चतुर्दशी रात्रि ११|५३ यावत् तदुपरि— #अमावस्याl ✹•⁘••⁘•✹•⁘••⁘•✹•⁘•⁘•✹•⁘••⁘•✹•⁘••⁘•✹ ❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀ #दुर्गामन्दिरशक्तिपीठ_वाटिका

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