॥श्री वाराह मन्त्र साधना विधान ॥
(भय▪️भूमि दोष▪️गृह बाधा▪️आर्थिक अस्थिरता,)
👉 जब धरती डगमगाती है, तब भगवान स्वयं आधार बनते हैं।
✨शास्त्रीय प्रमाणों से वराह भगवान की महिमा ✨
🌹⚜️श्रीमद्भागवत महापुराण (३.१३.३०–३४)
दंष्ट्राग्रकोट्या भगवांस्तदुद्धरन् ।
क्रीडन्निवाब्धिं व्यतरत्स्वयम्भूः।।
अर्थ – भगवान वराह ने अपनी दंष्ट्रा पर पृथ्वी को इस प्रकार उठाया, मानो जल में लीला कर रहे हों।
🌹🌹श्री विष्णु पुराण🌹🌹
वराहो नाम भगवान् स्वयं विष्णुः सनातनः।
धरा रक्षण हेतु साक्षादाविर्भूतः हरिः॥
🐗🔥॥ श्री वराह मंत्र – स्थिरता, रक्षा और ऐश्वर्य का दिव्य रहस्य ॥🔥🐗
श्री वराह मंत्र भूमि दोष, गृह बाधा, आर्थिक अस्थिरता, भय, शत्रु पीड़ा और अकस्मात संकट को नष्ट करने वाला अति प्रभावशाली मंत्र है।
यह मंत्र वैष्णव, पौराणिक और तांत्रिक—तीनों परंपराओं में सिद्ध माना गया है।
🔱 मंत्र स्वरूप 🔱
✨ सरल वैष्णव मंत्र
।।ॐ नमो भगवते वराहाय ॥
✨ सिद्ध बीज मंत्र (विशेष साधना हेतु)
⚜️⚜️।।ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवते वराहाय नमः ॥🔥📿
⚜️⚜️मंत्र साधना का विनियोग ⚜️⚜️
अस्य श्रीवराहमहामंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्री छन्दः श्रीवराहभगवान् देवता ह्रीं बीजम् श्रीं शक्तिः क्लीं कीलकम् मम तथा मम कुटुम्बस्य भूमिदोष–गृहबाधा–दारिद्र्य–भय–शत्रुपीडा नाशनपूर्वकं स्थिरधन–भूमि–वैभव–रक्षण–आयुरारोग्य सिद्ध्यर्थं श्रीवराहभगवत्प्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥
✋🕉️ न्यास विधि (अत्यंत विस्तृत) ॥🕉️✋
🔸 कर न्यास
ॐ ह्रीं – अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ॐ श्रीं – तर्जनीभ्यां नमः
ॐ क्लीं – मध्यमाभ्यां नमः
ॐ भगवते – अनामिकाभ्यां नमः
ॐ वराहाय – कनिष्ठिकाभ्यां नमः
नमः – करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
🔸 अङ्ग न्यास
,▪️हृदयाय नमः
▪️शिरसे स्वाहा
▪️शिखायै वषट्
,▪️कवचाय हुम्
▪️नेत्रत्रयाय वौषट्
▪️अस्त्राय फट्
🌸⚜️श्री वराह भगवान का अत्यंत दिव्य ध्यान ⚜️🌸
नीलमेघनिभं देवमेकदंष्ट्रं महाबलम्।
धरां दधार यो दंष्ट्रां तं वराहं नमाम्यहम्॥
चक्रशङ्खगदापद्मैः शोभितं भुजचतुष्टयम्।
श्रीवत्सवक्षसं देवं ध्यायेत्सर्वभयापहम्॥
रसातलात् समुद्धृत्य धरां यस्य पराक्रमात्।
भक्तानां भयभङ्गाय वराहो जायते हरिः॥
यस्मिन् ध्याते स्थिरा लक्ष्मीः यस्मिन् स्मृते नश्यति भीः।
तं वराहरूपं देवं भजे संसारमोचनम्॥
⏰⚜️ साधना विधि – समय, स्थान व विधान ⚜️⏰
🕰️ श्रेष्ठ समय
🔹ब्रह्ममुहूर्त
🔹अमावस्या, पूर्णिमा
🔹गुरुवार या शनिवार
🔹रात्रि 10–12 (गुप्त साधना)
⚜️⚜️ आसन⚜️⚜️
कुशासन / ऊनी आसन / लाल वस्त्र
📿 माला▪️कमलगट्टा (श्रेष्ठ)▪️स्फटिक / तुलसी
🕯️ दीपक▪️घी या तिल तेल▪️उत्तर दिशा में
🌼 पंचोपचार पूजन
गंध – पुष्प – धूप – दीप – नैवेद्य
⚜️⚜️॥ जप संख्या व अनुष्ठान विधान ॥⚜️⚜️
🔹दैनिक: 108 या 216 जप
🔹विशेष सिद्धि:▪️11,000 या 21,000
🔹1,25,000 जप (पूर्ण सिद्धि)
⚜️🌹⚜️आहार–विहार–संयम के कठोर नियम⚜️🌹
✔ शुद्ध सात्त्विक भोजन
✔ ब्रह्मचर्य
✔ भूमि, गौ, ब्राह्मण का सम्मान
❌ मांस, मदिरा, झूठ, क्रोध, अहंकार वर्जित
⚠️🔥 सावधानियाँ एवं मंत्र दुष्परिणाम 🔥⚠️
🔹मंत्र का उपहास न करें
🔹नियम तोड़ने से साधना उलटी हो सकती है
🔹अहंकार से मानसिक अशांति संभव
🌟🏵️ श्री वराह मंत्र जप के चमत्कारी फल 🏵️🌟
✨ भूमि व गृह विवाद समाप्त
✨ स्थिर धन व संपत्ति
✨ भय, शत्रु व दुर्घटना से रक्षा
✨ मानसिक स्थिरता व आत्मबल
✨ भगवान वराह की साक्षात कृपा
🙏🕉️ दिव्य उपसंहार 🕉️🙏
श्री वराह भगवान की साधना वह अमोघ शक्ति है, जो डगमगाते जीवन को स्थिर आधार देती है।
जो साधक श्रद्धा से जप करता है—
👉 उसकी पृथ्वी, उसका भाग्य और उसका जीवन—तीनों सुरक्षित हो जाते हैं।
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🕉️ जय श्री वराह भगवान 🕉️