श्रीसरस्वती मानस पूजा!! (हिन्दी भावार्थ सहित )
ॐ सरस्वत्यै च विद्महे । मनस्स्थायै च धीमहि । तन्नो वाक्श्रीः प्रचोदयात् ॥
अर्थ:हम उस देवी सरस्वती को जानें, जो मन में प्रतिष्ठित हैं।
उनका ध्यान करें —वे वाणी की श्री (तेज, सौंदर्य और सत्य) को हमारे भीतर प्रेरित करें।
अथ श्रीसरस्वती मानसपूजा
🍁सरस्वति महाज्ञाने अन्तर्ज्ञानप्रकाशिके ।
मनःपवित्रहंसस्थे मनोवाक्श्वेतवस्त्रभे ॥१
अर्थ:हे महासरस्वती!आप महान ज्ञानस्वरूपा हैं, अंतरज्ञान को प्रकाशित करने वाली हैं।आपका निवास पवित्र मनरूपी हंस में है,आपका स्वरूप मन और वाणी की श्वेत पवित्रता से प्रकाशित है।
🍁मनआभरणे वाणि मनोवाणिसुरूपिणि ।
मनआरामसङ्गीते मनोनादप्रसन्नते ॥२
अर्थ:हे वाणी देवी!आप मन की शोभा हैं, मन और वाणी का सुंदर स्वरूप हैं।आपके संगीत से मन को विश्राम मिलता है
और आपके नाद से मन प्रसन्न होता है।
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वीणातुम्बरसान्निध्ये मनोगानसुवाक्स्थिते ।
मनोवीणालये मातर्मनोवीणासुवादिनि ॥३
अर्थ:हे माता!आप वीणा और तुंबर (संगीत देवता) के सान्निध्य में स्थित हैं।आप मन के गीतों और शुभ वाणी में वास करती हैं।
आप मनरूपी वीणा में निवास कर उसे मधुर बनाती हैं।
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मनोध्यानाभिषिक्ते श्रीर्मनोलीनमदम्बिके ।
मनःपुष्पार्चिते मातर्मनोमयसुविग्रहे ॥४
अर्थ:हे अम्बिके! आप मन के ध्यान से अभिषिक्त हैं।
आप मन में लीन होकर प्रकट होती हैं। मन के पुष्पों से आपकी पूजा की जाती है और आपका स्वरूप भी मनोमय है।
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मनआमयपीडाहे मनस्स्मेरमहाद्युते ।
मनोगानश्रुते मातर्मनोगानसुनादिनि ॥५
अर्थ:हे माता!आप मन के रोगों और पीड़ाओं का नाश करती हैं।आपका तेज मन को हर्षित करता है।आप मन के गीतों को सुनने वालीऔर मन के नाद को मधुर करने वाली हैं।
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मनोदीपस्फुरद्रूपे मनोनीराजनस्तुते ।
मनःपूरणवाग्देवि मनःपूजासमर्पिते ॥६
अर्थ:हे वाग्देवी!आप मन के दीप की भाँति प्रकाशमान हैं।
मन की आरती से आपकी स्तुति होती है।आप मन को पूर्ण करने वाली हैंऔर यह मानस पूजा आपको समर्पित है।
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मानसापूजिते मातर्मानसापूजनारते ।
मानसागाननैवेद्ये मानसस्तुतमातृके ॥७
अर्थ:हे माता!आप मानस पूजा से पूजित होती हैं।आप स्वयं मानस पूजा में आनंद लेती हैं।मन का गायन ही आपका नैवेद्य हैऔर मन की स्तुति ही आपकी आराधना है।
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मानसालयदेवि श्रीः स्वीकुरुष्व मदर्पणम् ।
अपराधचयं क्षाम्यं देहि मे त्वत्पदाश्रयम् ॥८
अर्थ:हे मन में वास करने वाली देवी!मेरे इस अर्पण को स्वीकार करें।मेरे सभी अपराधों को क्षमा करेंऔर मुझे अपने चरणों का आश्रय प्रदान करें।
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मङ्गलं ते सुवाग्देवि सरस्वति सुमङ्गलम् ।
मनःपुष्पालये देवि मनःपूरणि मङ्गलम् ॥९
अर्थ:हे शुभ वाणी की देवी सरस्वती!आपको मंगल ही मंगल हो।हे मन-पुष्पों में विराजने वाली देवी! आप मन को पूर्ण करने वाली मंगलस्वरूपा हैं।
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त्यागराजगुरुस्वामिशिष्यापुष्पासमर्पितम् ।
मानसापूजनागानं सरस्वतिगुरुप्रियम् ॥१०
अर्थ:यह मानस पूजा और गायनत्यागराज गुरु स्वामी के शिष्य पुष्पा द्वारा अर्पित है, जो गुरु और सरस्वती — दोनों को प्रिय है।
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बालालापमिदं स्तोत्रं गुरुप्रीतं सुवाग्वरम् ।
वाणीकटाक्षसुज्ञानं वाग्देव्यनुग्रहावहम् ॥११
अर्थ:यह स्तोत्र बाल-सुलभ अलाप है,जो गुरु को प्रिय और श्रेष्ठ वाणी देने वाला है।यह सरस्वती की कृपादृष्टि से
सच्चा ज्ञान और वाणी का अनुग्रह प्रदान करता है।
🌷 जय माँ शारदा! जय वाग्देवी! 🌷